Monday, 6 June 2016

मिलन (Milan) 1995


फ़िल्म 'मिलन'  1 सितम्बर 1995 को रिलीज हुई थी। इस फ़िल्म में मुख्य कलाकार थे -
जैकी श्रॉफ, मनीषा कोइराला, गुलशन ग्रोवर, परेश रावल, अवतार गिल, आकाश खुराना, आदि।
फ़िल्म 'मिलन' के निर्देशक थे महेश भट्ट।

फ़िल्म में संगीत निर्देशन दिया था आनंद मिलिंद ने। यह फ़िल्म अपने मधुर गीतों के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुई थी। इस फ़िल्म के कई गीत आज भी लोकप्रिय हैं।

फ़िल्म की कहानी।



फ़िल्म की कहानी गोआ के अपराधिक पृष्ठभूमि और एक स्मगलर की प्रेम कहानी पर आधारित है।

राजा (जैकी श्रॉफ) और केविन केकड़ा (गुलशन ग्रोवर) गोआ में किसी भाई के लिए स्मगलिंग का काम करते हैं। राजा को ये पता नहीं रहता है कि दरअसल इस गैंग का असली संचालक कौन है?
राजा का बड़ा भाई (आकाश खुराना) जिसे सभी लोग भाई साहब के नाम से जानते हैं, वो गोआ का नामी नेता है एवं समाज में उसकी छवि एक साफ़ सुथरे इंसान के रूप में है।
एक दिन राजा की मुलाक़ात प्रिया (मनीषा कोइराला) नाम की भोली भाली लड़की से हो जाती है, और दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठते हैं। प्रिया एक अनाथ लड़की है जो छोटी सी दूकान में मूर्तियां बेचा करती है।पहले तो प्रिया को राजा के धंधों की जानकारी नही रहती है लेकिन एक रात उसे राजा के धंधे की जानकारी उस वक़्त मिल जाती है जब उसने पुलिस को राजा और केकड़ा को धमकाते हुए देख लिया। प्रिया नहीं चाहती कि राजा अपराध की कमाई से अपना घर बसाये। इसलिए वो राजा को ईमानदारी की कमाई कमाने को कहती है।
राजा प्रिया की बात मान लेता है और स्मगलिंग का काम छोड़ मेहनत मजदूरी कर के अपनी दूकान खड़ी करता है फिर उसकी कमाई से एक सुन्दर व छोटा सा मकान बनाता है।
राजा के स्मगलिंग छोड़ने के बाद पुलिस कमिश्नर (अवतार गिल) उसे सभी  दूसरे स्मगलरों के खिलाफ गवाही देने को राजी कर लेते हैं। राजा के इस कदम से केविन केकड़ा बौखला उठता है। और वो पहुँच जाता है इस गैंग के असली संचालक यानि भाई साहब के पास। भाई साहब के गैंग में पुलिस इंस्पेकटर कोटक (परेश रावल) भी शामिल है और वही पुलिस महकमे की अंदरुनी खबर भाई साहब को लीक करता रहता है।
भाई साहब की भी अपनी एक पर्सनल कहानी है। दरअसल वो दुनिया के सामने अत्यंत शरीफ इंसान है लेकिन अंदर से वो वहशी इंसान है जो अपनी ही नौकरानी जया (सुधा चन्द्रन) को शादी का झांसा देकर अपनी हवस का का शिकार बना उसकी इज़्ज़त से खेलता है। जिसके कारण कुछ दिनों में जया गर्भवती हो जाती है।जब भाई साहब को जया के गर्भवती होने की जानकारी मिलती है तो वो जया से शादी करने से मुकर जाता है और वो जया को सख्त हिदायत देता है कि वो अपने गर्भवती होने की बात किसी को ना बताये। लेकिन जया राजा को भाई साहब की असलियत बता देने का फैसला करती है, और वो राजा को खोजने जाती है, किन्तु राजा उसे नही मिलता है। जब वो लौट कर घर आती है तो भाई साहब उससे बेहद नाराज होता है। वो केविन केकड़ा और इन्स्पेक्टर कोटक के साथ मिल कर जया की हत्या कर देता है और उसकी डेड बॉडी राजा के बोट में रख देता है।
जब राजा अपनी और प्रिया की शादी की तारीख पक्की कर अपने बोट पर आता है तो जया की लाश देख कर चौंक जाता है, तभी वो समझ जाता है कि केविन केकड़ा ने उसे फंसा दिया है। तब तक इन्स्पेक्टर कोटक राजा के बोट पर आ जाता है और उसे गिरफ्तार कर लेता है।
जब प्रिया को राजा की गिरफ्तारी की खबर मिलती है तो उसे यकीन है कि राजा बेगुनाह है। और वो राजा के वापस आने का इन्तजार करती है।
पुलिस स्टेशन के लॉकअप में बन्द राजा से मिलने भाई साहब जाता है तो राजा उसे बताता है कि वो बेगुनाह है और और इस सब के पीछे केकड़ा की साजिश है।
भाई साहब ये बात इन्स्पेक्टर कोटक को कहता है और कहता है कि किसी भी तरह से राजा से जया की हत्या का जुर्म कबुलवाये।
उसी रात इन्स्पेक्टर कोटक राजा पर काफी अत्याचार करता है ताकि वो जया की हत्या की बात कबूल ले। लेकिन राजा नहीं टूटता है। जब एक बार इन्स्पेक्टर कोटक अकेले में राजा को टॉर्चर करने के लिए जाता है तो मौक़ा पा कर राजा इन्स्पेक्टर कोटक पर हमला कर उसके हाथ तोड़ देता है और लॉकअप से फरार हो कर सीधे प्रिया के पास पहुँच जाता है। और उसे अपने साथ कहीं दूर भाग चलने को कहता है। लेकिन प्रिया राजा के साथ कहीं भागने स इंकार कर देती है। गुस्से से लाल हो कर राजा केकड़ा के पास पहुँचता है और उसे पीटते हुए पुलिस कमिश्नर के पास पहुँचता है। जहां कमिश्नर राजा को इन्साफ दिलाने का भरोसा देता है।
जब भाई साहब देखता है कि ईमानदार पुलिस कमिश्नर राजा के पक्ष में है तो वह राजा के केस को देखने वाले जज को ही भारी भरकम रिश्वत दे कर राजा को 20 साल की सजा दिलवा देता है।
राजा अपनी सजा पूरी करने के लिए जेल पहुँचता है तो उसका सामना एक भ्रष्ट जेलर से होता है। जेलर उस पर अत्याचार करना चाहता है लेकिन जब दूसरे खूंखार कैदियों को पता चलता है कि राजा ने पुलिस इन्स्पेक्टर के हाथ तोड़ दिया था तो वो लोग भी राजा को अपना गुरु मान लेते हैं।
जेल में ही राजा को पता चलता है कि एक पहाड़ को तोड़ देने पर पेरोल पर 3 दिन की छुट्टी मिल सकती है तो वो दिन रात मेहनत कर उस पहाड़ को तोड़ देता है। अब उसे पेरोल पर छुट्टी मिलनी चाहिए थी। लेकिन केविन केकड़ा, इन्स्पेक्टर कोटक और भाई साहब मिल कर भ्रष्ट जेलर को अपने पक्ष में मिला लेते हैं और इसका पेरोल कैंसिल करवा देते हैं। लेकिन पुलिस कमिश्नर राजा का पेरोल का आर्डर ले आते हैं और जेलर के खिलाफ कार्यवाही करवाने का भी आदेश देते हैं। जब से राजा को पेरोल पर तीन दिन की छुट्टी की खबर प्रिया को मिलती है तो वो इन्ही तीन दिनों में राजा के साथ अपनी शादी की तैयारी में लग जाती है।
राजा के बाहर आने की खबर से केविन केकड़ा, भाई साहब और इन्स्पेक्टर कोटक बौखला उठते हैं और राजा को पेरोल पर छूटने से एक दिन पहले ही जेल में ही मार डालने की साजिश रचते हैं और जेलर उनकी इस साजिश को अंजाम देने की पूरी तैयारी कर लेता है। योजना के  मुताबिक़ जेलर के विश्वासपात्र कैदी राजा पर हमला कर देते हैं। लेकिन राजा इस हमले को नाकाम कर देता है और जान बचाते हुए अंडरग्राउंड नाले से होते हुए जेल से बाहर आ जाता है। लेकिन वहां जेलर उसका इन्तजार कर रहा होता है। जेलर उस पर गोली चलाता है लेकिन राजा ना केवल उसका शिकार होने से बचता है बल्कि जेलर को नाले में डूबा कर मार देता है। इसके बाद राजा सीधे केकड़ा के घर जाता है और उसे बुरी तरह पीटता है और इस साजिश के पीछे मुख्य साजिशकर्ता का नाम जानना चाहता है। हाथापाई में केकड़ा की पीठ में खंजर घुस जाता है। मरते मरते केकड़ा राजा को भाई साहब की असलियत बता देता है।
इधर चर्च में प्रिया राजा के साथ शादी करने का इन्तजार कर रही होती है। लेकिन जब राजा नही पहुँचता है तो वो थक हार कर  का अपने घर चली जाती है। तभी वहाँ भाई साहब औए इन्स्पेक्टर कोटक भी प्रिया के घर आ जाते हैं और प्रिया की इज़्ज़त लूटना चाहते हैं। तभी वहां राजा आ धमकता है। और वो गुस्से में बेकाबू हो कर इंस्पेकटर कोटक की पीट पीट कर हत्या कर देता है और भाई साहब को ज़िंदा जला कर मार देता है।
इसके बाद राजा फिर से अपने आपको कानून के हवाले कर देता है और जेल से प्रिया को खत लिखता है कि वो किसी और के साथ शादी कर के अपना घर बसा ले।
बीस साल बाद जब राजा सजा पूरी कर जेल से बाहर आता है तो उसे पता नही रहता है कि प्रिया ने क्या किया? उसे हल्की सी उम्मीद रहती है कि शायद प्रिया ने उसकी बात नहीं मानी होगी और वो आज भी उसका इन्तजार कर रही होगी।
जब वो अपने घर के समीप आता है तो देख कर काफी खुश हो जाता है क्यों कि प्रिया आज भी उसका इन्तजार कर रही थी।
अंततः दोनों का मिलन हो जाता है।

फ़िल्म का निर्देशन काफी अच्छा है और सभी कलाकारों ने बेहतरीन भूमिका निभाई है। यह फ़िल्म जैकी श्रॉफ की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। फ़िल्म में जैकी श्रॉफ एक रौबदार किरदार में नजर आते हैं। मनीषा कोइराला की मासूमियत भी काफी असरदायक है। इस फ़िल्म में जैकी श्रॉफ और मनीषा कोइराला की जोड़ी काफी जमी है। 

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